लखनऊ, 28 नवंबर 2025 — Yogi Adityanath government (यूपी सरकार) ने आदेश जारी किया है कि अब Aadhaar Card को जन्म-तिथि (Date of Birth / DOB) प्रमाण-पत्र के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
⚠️ क्यों लिया गया यह फैसला
सरकार के निर्देश अनुसार, आधार कार्ड में जन्म-तिथि “स्वयं घोषित” (self-declared) होती है, यानी आधार बनाए जाते समय उसका कोई असली जन्म प्रमाण पत्र (जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल रिकॉर्ड, अस्पताल प्रमाणपत्र आदि) अनिवार्य रूप से संलग्न नहीं होता।
इस कारण आधार में दर्ज जन्म-तिथि को प्रमाणिक नहीं माना जा सकता — इसलिए यह अब DOB का मान्य दस्तावेज़ नहीं रहेगा।
अब कौन से दस्तावेज स्वीकार होंगे
यूपी सरकार ने स्पष्ट कहा है कि भविष्य में DOB प्रमाण के लिए केवल निम्न दस्तावेज मान्य होंगे:
नगर-निकाय / पंचायत / अस्पताल द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate)
स्कूल (हाई-स्कूल या समकक्ष) की मार्कशीट / सर्टिफिकेट जिसमें जन्म-तिथि हो
पासपोर्ट, या अन्य वैध सरकारी दस्तावेज जिसमें जन्म-तिथि दर्ज हो सकती है (जहाँ लागू हो)
️ आदेश का दायरा — किन मामलों में लागू होगा
यह आदेश केवल जन्म-तिथि (DOB) के प्रमाण संबंधी दस्तावेजों पर लागू होगा। इसका मतलब है कि सरकारी नौकरी, पेंशन, छात्रवृत्ति, लाइसेंस, अन्य आवेदन — जिसमें उम्र की जानकारी आवश्यक है — अब आधार कार्ड स्वीकार नहीं होगा।
हालाँकि, आधार कार्ड पहचान (identity) और पते (address) प्रमाण के रूप में अब भी काम करेगा — लेकिन जन्म-तिथि पुष्टि के लिए इसका इस्तेमाल नहीं हो सकेगा।
✅ सरकार का मकसद / वजह
इस कदम का उद्देश्य जन्म-तिथि की प्रामाणिकता सुनिश्चित करना है। क्योंकि कई मामलों में आधार में दर्ज जन्म-तिथि सही नहीं होती — अनुमानित या गलत दर्ज होती रही — जिससे धोखाधड़ी, गलत सूचना या पहचान/आयु विवाद की संभावना रहती थी।
सरकार चाहती है कि केवल “वास्तविक और प्रमाणित” दस्तावेजों का ही उपयोग हो — जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया, भर्ती और अन्य सरकारी कामों में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे।

